हरिद्वार की कल की ताजा हालात की फोटो।




यह तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं  
इसलिए ऐसी और बहुत सारी तस्वीरें हैं जो डाली नहीं।  
हरिद्वार की कल की ताजा हालात की फोटो।
गर्मियों की छुट्टियां पड़ चुकी है और इन छुट्टियों में सभी लोग सपरिवार आनंद उठाने के लिए पर्यटन स्थलों की ओर आने लगते हैं। जरूरी भी है, साल में छुट्टियां बड़ी मुश्किल से मिलती है। बच्चों को और उन्ही के बहाने सबको समय मिलता है। चलो घूम आते हैं.....
लेकिन मैं आप सब से एक गुजारिश करूंगा, कि आप जाइए, घूमिए और सपरिवार अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद उठाइए।
लेकिन गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जब भी आप किसी पर्यटन स्थल के लिए अपना यात्रा कार्यक्रम बनाएं।
तो अब सबसे पहले यह मत देखें कि वहां पर होटल कितना सस्ता है, वहां पर खाना कितना सस्ता है, वहां पहुंचने के किलोमीटर कितने कम और ज्यादा है??
बल्कि अब मैं हर घुमक्कड़ परिवार से यह निवेदन करूंगा, कि अपनी यात्रा कार्यक्रम बनाते हुए अब शुरुआत एक नई सोच के साथ करें। कि जिस पर्यटन स्थल पर हम जा रहे हैं, उस पर्यटन स्थल का क्षेत्रफल कितना है, वहां पर लोगों के आने की संभावना कितनी है। और वहां के वास्तविक हालात कैसे हैं। अन्य सुविधाएं कैसी है।
क्योंकि हर शहर, गांव, कस्बे का जनसंख्या घनत्व के हिसाब से ही प्रशासनिक व्यवस्था हो सकती है और किसी निश्चित दिन और समय में अगर उस जनसंख्या घनत्व से 10 गुना 5 गुना जनसंख्या उस शहर के अंदर पहुंच जाए तो उस शहर के क्या हालात होंगे यह समझना बहुत मुश्किल नही इसे समझने के लिए सिर्फ आज कल आप हरिद्वार ऋषिकेश आ जाइए।
हम आप भी प्रशासन और सरकारों को गालियां देकर अपनी जिम्मेवारी से पीछा छुड़ा लेते हैं।तो क्या आप कि हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं? क्या हमें उस भीड़ का हिस्सा बनना जरूरी है?
और अगर हम उस भीड़ का हिस्सा बन चुके हैं, तो हम उस भीड़ में कैसे व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग कर सकते हैं उस पर भी हमें विचार करना चाहिये।
मेरी आप सब से यही विनती है कि अगर आप ऐसे भीड़ भरे स्थानों पर आना चाहते हैं, तो जरूर आए।
लेकिन नीचे लिखी कुछ बातों पर अनुसरण करेंगे, तो बहुत आपको भी अच्छा लगेगा और बाकी लोगों को भी अच्छा लगेगा। आप कुछ सुखद यादों को मन में लेकर ही घर लौटेंगे।
यही कुछ छोटी मोटी बातें जैसे कि.....
सभी रास्तों का मैप और ऑप्शन की जानकारी आने से पहले दिमाग मे रखें।
कोशिश करें किसी लोकल व्यक्ति से इंटरनेट या फोन के माध्यम से वास्तविक स्थिति के अनुसार प्रोग्राम बनाएं।
सामान्य ट्रैफिक नियमों के अलावा स्थान विशेष पर परिस्थिति के अनुसार किए गए ट्रैफिक नियमों का भी पालन करें। कुछ लोग जबरदस्ती जिद पर अड़ जाते हैं कि मुझे यही पार्किंग करनी है मुझे यही जाना है मैं तो हमेशा जाता हूं मैं तो हमेशा आता हूं जबकि उस दिन की क्या स्थिति है वह उस दिन वहां मौजूद प्रशासन को पता होगी।
कहीं पहुंचने के लिए निश्चित समय या अपने टारगेट समय को लेकर जल्दबाजी बिल्कुल न करें।
अपने आसपास मौजूद गाड़ियों यात्रियों और लोकल नागरिकों के साथ यथासंभव सहयोग और मुस्कुराहट बनाए रखें। क्योंकि उस परिस्थिति में वहां सब बराबर के साथी और भुक्तभोगी है। आप या आपकी गाड़ी अकेली नहीं है।
आजकल हरिद्वार के हालात को देखते हुए मेरी आपसे और विनती है कि आप अपनी गाड़ी में पानी की बोतल खरीदने की बजाय घर से ही एक पानी का कैंपर भरकर रखें और जहां पर पानी मिले उसे दोबारा भरते रहे। इससे शहर में हजारों लाखों प्लास्टिक की बोतलें कूड़ा बनने से बचेंगे।
पर्यटन स्थल की सुंदरता को बनाए रखने के लिए व्यर्थ का कूड़ा मत फैलाएं। और अगर आपको कोई ऐसा करता दिखे तो उससे भी विनती करें की उसे किसी निर्धारित स्थान विशेष पर निस्तारित करें।
यात्रा करते समय अगर कोई दूसरा पर्यटक या परिवार किसी दुविधा या मुसीबत में मिले तो एक बार रोककर उसे सहायता के लिए या पानी के लिए जरूर पूछें।
घर से पुरानी पानी की बोतल में साफ शुद्ध पानी भरकर गाड़ी में रखें और चलते समय खासकर हरिद्वार ऋषिकेश या ऐसे पर्यटन स्थलों पर जहां पर बहुत ज्यादा भीड़ और मारामारी हो चुकी है आप की ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रहे पुलिसवालों को वह पानी की बोतल थमा कर उनका धन्यवाद करें। भले ही वर्दी में हो, है तो इंसान ही, जो उस भीषण गर्मी और भीड़ के बीच आपकी यात्रा को सुचारू बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तत्पर रहते हैं।
बाकी ऐसे आप हम सभी के अपने अपने व्यक्तिगत अनुभव से और भी बहुत सुझाव होंगे। अगर वह सुझाव हम सब यहां साझा कर सकें और कुछ लोग भी उन सुझाव को पढ़कर अपने जीवन में या इस गर्मियों की छुट्टियों में उन पर अमल कर सकें तो उससे अच्छा कुछ नहीं होगा।
यकीन मानिए यह सब इतना मुश्किल भी नहीं है बहुत साधारण सी बातें हैं।
लेकिन यही छोटी-छोटी साधारण बातें हमारी किसी यात्रा की कड़वी यादों को मीठी यादों में बदलने की क्षमता भी रखती है।
करके देखिए, आपको अच्छा लगेगा
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